संयुक्त राष्ट्र संघ एवं विश्वशांति

संयुक्त राष्ट्र संघ

इतिहास साक्षी है कि युद्ध के पश्चात शांति स्थापना के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रथम विश्व युद्ध की भीषण नरसंहार एवं अपूर्ण क्षति के कारण विश्व शांति सहयोग तथा भावना बनाए रखने के लिए लीग ऑफ नेशनल नामक संस्था की स्थापना की गई किंतु दुर्भाग्यवश यह अपने उद्देश्य की प्राप्ति में असफल रहा और द्वितीय विश्व युद्ध के लिए उत्तरदाई कारकों को नियंत्रित नहीं कर सका।

भारत के पड़ोसी देशों से संबंध

(1) नेपाल-: भारत और नेपाल के संबंध प्राचीन काल से ही मधुर रहे हैं। भारत ने नेपाल के विभिन्न परियोजनाओं की पूर्ति के लिए समय-समय पर पर्याप्त आर्थिक सहायता प्रदान की है। वर्तमान समय में भारत और नेपाल के संबंध मैत्रीपूर्ण ही है। 5 जनवरी 1999 ईस्वी को भारत और नेपाल के बीच 7 वर्षीय पारगमन संधि संपन्न हुई है। दोनों देशों के राष्ट्रीय नेताओं ने एक दूसरे के यहां जाकर संबंधों को और अधिक दृढ़ता प्रदान की है।

(2) चीन-: 1962 ईस्वी में चीन द्वारा भारत पर बड़े पैमाने पर आक्रमण किए जाने के कारण भारत और चीन के संबंध कटी पूर्ण रहे हैं। 1967 के प्रारंभ से ही भारत ने चीन के साथ संबंधों को सुधारने का प्रयास शुरू कर दिया कालांतर में 1980 ईस्वी में बेलग्रेड में भारतीय प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और चीनी प्रधानमंत्री ‘हुआ कुओ फेग’ के बीच बातचीत के बाद संबंधों में सुधार कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। दिसंबर 1988 में भारतीय प्रधानमंत्री की पांच दिवसीय चीन यात्रा तथा 1991 में चीनी प्रधानमंत्री ली पेन की भारत यात्रा से दोनों देशों के संबंधों में सुधार की गति और तेज हुई। जून 2003 ईस्वी में भारतीय प्रधानमंत्री ने  चीन की यात्रा की और यह तय किया कि सीमा विवाद के समाधान हेतु उच्च स्तरीय बैठक होगी। नवंबर 2006 में भारत-चीन संबंध में एक नया अध्याय जुड़ गया। जब चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ और भारत के प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के मध्य नाभिकीय ऊर्जा में  सहयोग सहित अन्य समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। चीनी राष्ट्रपति मी जिनपिंग ने सितंबर 2014 में भारत की यात्रा की। इस दौरान भारत- चीन के बीच समझौता पर हस्ताक्षर किए गए। चीन ने भारत के श्रद्धालुओं के लिए कैलाश मानसरोवर जाने के लिए सिक्किम के नाथूला दर्रे से दूसरा मार्ग प्रदान किया जबकि पहला मार्ग लिपुलेख दर्रे (उत्तराखंड) से होकर है। चीन अगले 5 वर्ष में भारत में 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करेगा। मुंबई-शंघाई को सिस्टर सिटी के रूप में स्थापित किया जाएगा। इसी तरह अहमदाबाद के बीच सिस्टम सिटी संबंध विकसित किया जाएगा, गुजरात और गोवा के बीच संबंध स्थापित किया जाएगा दोनों देशों ने सीमा विवाद सुलझाने के लिए सकारात्मक प्रयास पर बल दिया। भारत ने चीनी राष्ट्रपति के सम्मुख चीनी सैनिकों द्वारा बार-बार भारतीय सीमा के अतिक्रमण पर चिंता प्रकट की।

(3) पाकिस्तान-: पाकिस्तान भारत का पड़ोसी देश है भारत के 4 राज्य गुजरात, राजस्थान, पंजाब एवं जम्मू कश्मीर इसकी सीमा को स्पर्श करते हैं। स्वाधीनता के बाद  प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने पाकिस्तान के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करने की चेष्टा की थी। किंतु पाकिस्तान प्रारंभ से ही बैरवा का पक्ष पोषण करता रहा 1965 ईस्वी व 1971 ईस्वी में पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण कर शत्रु एवं सम्मानित मानसिकता का परिचय दिया यद्यपि दोनों युद्धो में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को बुरी तरह पराजित कर दिया था। 1971 के युद्ध के बाद भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और वोटों के बीच 1972 इस बीच शिमला समझौता हुआ इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच उत्पादों को शांतिपूर्वक भारत में मई  2014 में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में सार्क देशों के प्रमुख को आमंत्रित किया गया था। जहां भारत की प्रधानमंत्री की पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात हुई लेकिन फिर भी भारत-पाक सीमा पर तनाव कायम है। पाकिस्तान द्वारा सीमा पर लगातार सीजफायर का उल्लंघन और आतंकवादियों को घुसपैठ कराने की विधि जारी है।

(4) बांग्लादेश-:बांग्लादेश के निर्माण में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पर अब बांग्लादेश का कृतज्ञ होना स्वाभाविक ही था 19 मार्च 1972ईस्वी को दोनों देशों के बीच 25 वर्षीय शांति संधि संपन्न हुई थी। कविता या अफसरों को छोड़कर भारत बांग्लादेश के संबंध मधुर ही रहे हैं। जून 1998 ईस्वी में शेख हसीना की भारत यात्रा और जून 1999 में कोलकाता के बीच बसे प्रधानमंंत्री अटल बिहारी बाजपेई बांग्लादेश की यात्रा पर भारत द्वारा रुपए 200 करोड़ कर दिया जाना भारत-बांग्लादेश के बीच अच्छे संबंधों का कारण है। दोनों देशों के बीच जल नदी बटवारा व्यापार और पर्यटन आर्थिक सहयोग और सीमा सुरक्षा के विषय पर दोनों देशों के बीच गतिरोध बनता रहता है। सीमा पर बांग्लादेशियों की भारत में अवैध घुसपैठ भारत के लिए एक गंभीर समस्या बनी हुई है।

(5) म्यांमार (बर्मा)-: म्यांमार के साथ भारत के महत्वपूर्ण संबंध रहे हैं। म्यांमार और भारत दोनों ही गुटनिरपेक्षता की नीति के समर्थक है। भारत और म्यांमार विस्फोटक और गंगा सहयोग के प्रमुख सदस्य देश हैं। भारत ने मेवाड़ को पास हुआ हादसा स्पष्ट किया है वह कि वह में मार के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप नही करेगा। म्यांमार में लोकतंत्र की प्रक्रिया प्रारंभ करने से सैन्य सरकार के प्रयास का भारत ने स्वागत किया। भारत ने वर्ष 2013 में म्यांमार को विकास कार्यो के लिए 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर का रेट प्रदान किया। वर्तमान में म्यांमार से भारत शरणार्थी एक गंभीर समस्या बने हुए हैं।

(6) श्रीलंका-: प्राचीन काल से भारत और श्रीलंका के बीच संबंध मधुर रहे हैं। किंतु तमिल समस्या को लेकर भारत और श्रीलंका के आपसी संबंधों में तनाव उत्पन्न हुआ। तमिल समस्याओं को हल करने के लिए 29 जुलाई 1987 ईस्वी को भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी और लंका के राष्ट्रपति जयवर्धन के बीच कोलंबो समझौता हुआ। कालांतर में 1995 ईस्वी में श्रीमती तुंगा की भारत यात्रा से दोनों देशों के संबंधों में नीति पोर्न का क्रम आरंभ हुआ। 27 दिसंबर 1998 ईस्वी को दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता भी संपन्न और किसी भी तरह का संकट आने पर भारत ने श्रीलंका की अन्य तरह की सहायता हमेशा की है। 

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मार्च 2015 में श्रीलंका की यात्रा पर गए। उन्होंने अपना प्रांत का भी दौरा किया पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंकाई संसद को संबोधित किया और श्रीलंका को यथासंभव सहायता का आश्वासन दिया।

(7) भूटान-: वर्ष 1947 में भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भूटान को स्वतंत्र देश के रूप में स्वीकार किया गया। 

 लेकिन 1971 में भूटान भारत की सहायता से मित्र राष्ट्र में मिला। भूटान ने सन 1971 में भारत के सहयोग से संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रवेश किया। भूटान की विदेश नीति भूटान की सहमति से भारत द्वारा संचालित होती है। 1949 में दोनों राष्ट्रों के द्वारा यह निश्चय किया गया कि भारत भूटान के आंतरिक शासन में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा। और भूटान के विदेशी संबंधों तथा प्रतिरक्षा का दायित्व भारत पर रहेगा। आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर दोनों देशों ने एक दूसरे का हमेशा समर्थन और सहयोग किया है।दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस)

दक्षिण एशिया में एकता व सहयोग के लिए दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय संगठन सहयोग संगठन दल क्षेत्र अथवा सार्क की स्थापना दिसंबर 1985 ईस्वी में हुई। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में सदस्य एशियाई देशों भारत, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल, श्रीलंका और पाकिस्तान के मध्य अध्यक्षों ने 7 दिसंबर 1985 को औपचारिक रूप से दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन की घोषणा की। सम्मेलन बंगलुरु में यह तय किया गया कि सार्क का मुख्यालय (काठमांडू) नेपाल में होगा। यह संगठन पर आर्थिक, संस्कृतिक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्य कर रहा है। वर्तमान में इनकी संख्या आठ है। अफगानिस्तान आठवां इस संगठन का सदस्य बना।

सार्क के उद्देश्य

1. दक्षिण एशियाई क्षेत्र की जनता के कल्याण खेलिए कार्य करना एवं उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का प्रयास करना।

2. दक्षिण एशियाई राष्ट्र की सामूहिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना।

3. अन्य विकासशील देशों के साथ रचनात्मक सहयोग करना।

4. अंतरराष्ट्रीय मामलों पर सामान्य हित के प्रश्न पर सहयोग प्रदान करना।

5. आर्थिक, सामाजिक, वैज्ञानिक और तकनीकी ज्ञान के क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग को बढ़ावा देना।

सार्क का महत्व

1. महा शक्तियों को दक्षेस के सूत्र से दूर रखा जाए।

2. सहयोग के नए क्षेत्र ढूंढने जाए।

3. सदस्य राष्ट्रों के बीच संस्कृतिक संपर्क विकसित किया जाए।

4. टकराव पैदा करने वाले मुद्दों से बचा जाए।

5. द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा दिया।

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