विदेशी व्यापार

भारत का विदेशी व्यापार
1. विदेशी व्यापार की संरचना।
2. विदेशी व्यापार की दिशा।

भारतीय विदेशी व्यापार की संरचना
विदेशी व्यापार की संरचना का तात्पर्य निर्यात तथा आयात की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के प्रकार से है वर्तमान समय में भारत विभिन्न प्रकार की वस्तुओं का आयात व निर्यात करता है इसमें प्राथमिक उत्पादन को लेकर सॉफ्टवेयर उत्पादक तक शामिल होते हैं।

भारत के प्रमुख आयात
1. पेट्रोलियम तेल एवं स्नेहक-: पेट्रोलियम पदार्थ भारतीय आजाद का सबसे बड़ा भाग होता है संपूर्ण आयात का लगभग 33% भाग पेट्रोलियम पदार्थ होते हैं इनका आयात मुख्यता या सऊदी अरब, ईरान, कुवैत, वेनेजुएला आदि देशों से होता है।
2. स्वर्ण एवं कीमती पदार्थ-: भारत में स्वर्ण तथा हीरे जेवरात की उपलब्धता बहुत कम है जबकि आभूषण उद्योग में इसकी आवश्यकता बहुत अधिक होती है इसलिए भारत में स्वर्ण एवं बहुमूल्य पदार्थों का प्रमुखता से आयात किया जाता है।
3. रसायन-: भारत कई प्रकार के रसायनों, दवाइयों, रंगने का सामान आदि का बड़ी मात्रा में आयात करता है इसका अधिकांश आयात संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप आदि से होता है।
4. परिवहन का सामान-: राष्ट्र के आर्थिक विकास के लिए आवश्यक परिवहन साधनों जैसे मोटर , समुंद्री जहाज, हवाई जहाज आदि का आयात जर्मनी, इटली, जापान, अमेरिका आदि से किया जाता है।
5. मशीनरी-: मशीनरी, उद्योग के विकास का आधार है भारत में तीव्र उद्योग के विकास के कारण आधुनिक मशीनरी की बड़े पैमाने पर मांग होती है इस मांग को पूरा करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, जर्मनी, जापान, चीन आदि से मशीनरी मंगाई जाती है।

भारत के प्रमुख निर्यात
1. कृषि संबंधी उत्पाद-: भारत के कुल निर्यात में कृषि संबंधी उत्पादन की हिस्सेदारी लगभग 12% है भारत प्रमुख कृषि निर्यात में मसाले जूट, खल, चावल, चाय, तंबाकू आदि शामिल है इनका निर्यात मुख्यतः संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप, रूस, अफ्रीका आदि देशों को होता है।

2. अयस्क व खनिज-: भारत में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है इसलिए यहां से मैग्नीज, अभ्रक, कच्चा लोहा आदि का निर्यात जापान, अमेरिका आदि देशों में कीया जाता है। सन 2013-14 में 34827 करोड का निर्यात किया गया।
3. इंजीनियरिंग सामान-: भारत बड़ी मात्रा में मोटर, बिजली के सामान, टेलीफोन आदि का निर्यात करता है। श्रीलंका, खाड़ी देश, सूडान, हंगरी आदि देशों को निर्यात किए जाने वाले इंजीनियरिंग सामानों का कुल निर्यात में हिस्सा लगभग 20% है।
4. चमड़ा तथा कपड़े का सामान-: भारत चावड़ा तथा कपड़े से निर्मित सामान का बहुत बड़ा निर्यातक है इसका निर्यात मुख्यतः संयुक्त राज्य अमेरिका इंग्लैंड फ्रांस जर्मनी आदि देशों में किया जाता है। सन 2013 14 में 34517 करोड़ों का चमड़ा तथा चमड़ा निर्मित सामान का निर्यात किया गया।
5. मसाले-: भारत विभिन्न प्रकार के मसालों के उत्पादन में विश्व प्रसिद्ध है मसालों का निर्यात मुख्यतः इंग्लैंड, जापान, रूस, नेपाल आदि देशों को किया जाता है। सन 2013 14 में 15981 करोड़ के मसालों का निर्यात किया गया।

भारतीय अर्थव्यवस्था में निर्यात का महत्व
1. मूल्यवान विदेशी मुद्रा की प्राप्ति-: विदेशी व्यापार से मूल्यवान विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान होती है तथा देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ता है।
2. प्राकृतिक संसाधनों का उचित दोहन-: विदेशी व्यापार की आवश्यकताओं के अनुसार वस्तुओं का निर्यात करने के लिए उद्यमी उद्योगों की स्थापना करते हैं जिससे देश के प्राकृतिक संसाधनों का उचित दोहन होता है रोजगार के अवसरों का सृजन होता है।
3. औद्योगिकीकरण को प्रोत्साहन-: विदेशी व्यापार के माध्यम से देश में औद्योगिकीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए पूंजी उपकरण एवं तकनीक की उपलब्धता न सुनिश्चित होती है जिससे देश की औद्योगिक नीति तीर्थ होती है ।औद्योगीकरण किसी देश के लिए विकास का सूचक होता है।

भारत के विदेशी व्यापार की दिशा
विदेशी व्यापार कि दिशा से तात्पर्य उन राष्ट्रों से है जिन्हें कोई राष्ट्र वस्तुओं का निर्यात करता है तथा जिन राष्ट्र से वह वस्तुओं का आयात करता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत के विदेशी व्यापार की दिशा में काफी परिवर्तन आया है।
1. भारत का व्यापार किसी विशेष देश या क्षेत्र तक सीमित न रहकर विश्वव्यापी हो गया है।
2. स्वतंत्रता प्राप्ति के कुछ समय बाद भारत प्राथमिक वस्तुओं का निर्यात देश था लेकिन अब इंजीनियरिंग, आभूषण, सॉफ्टवेयर आदि का मुख्य निर्यातक है।
3. स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत खाद्यान्न आयात देश था जो अब निर्यातक राष्ट्र बन गया है।
4. पिछले दो दशकों में निर्यात की दिशा पूर्वी एशिया की तरह हो गई है।
5. वर्तमान समय में फोकस, अफ्रीका के अंतर्गत अफ्रीकी देशों से विदेशी व्यापार को बढ़ावा देने पर बल दिया जा रहा है।

विदेशी व्यापार की विशेषताएं
1. भारत का अधिकांश व्यापार लगभग 90% समुद्री मार्गो से होता है।
2. भारतीय उत्पादक काम 27% निर्यात पश्चिमी यूरोपीय देशों, 20% उत्तरी अमेरिकी देशों, 51% एशियाई एवं ऑस्ट्रेलियाई देशों तथा शेष अफ्रीकी एवं दक्षिणी अमेरिकी देशों को होता है।
3. भारत का अधिकांश विदेशी व्यापार लगभग 35 देशों में होता है।
4. भारतीय आयात का लगभग 33% हिस्सा केवल पेट्रोलियम पदार्थों का होता है।
5. व्यापार का भुगतान संतुलन के प्रतिकूल रहना।

व्यापार संतुलन
1. अनुकूल व्यापार संतुलन-: जब आयात मूल्य की अपेक्षा निर्यात मूल्य अधिक हो जाता है विदेशों में महंगाई के वस्तुओं के मूल्य से विदेशों में भेजी गई वस्तु का मूल्य अधिक हो तो उसे अनुकूल व्यापार संतुलन कहा जाता है।

2. प्रतिकूल व्यापार संतुलन-: यह अनुकूलन व्यापार संतुलन की विपरीत स्थिति है और निर्यात मूल्य की अपेक्षा आयात मूल्य अधिक होता है।

3. संतुलित व्यापार संतुलन-: जब आयात एवं निर्यात मूल्य संतुलन या बराबर की स्थिति में होता है तो उसे संतुलित व्यापार संतुलन कहा जाता है।