लोकतंत्र क्या है :लोकतंत्र की विशेषताएं, प्रमुख फैसले निर्वाचित नेताओं के हाथ

लोकतंत्र क्या है

लोकतंत्र शासन का एक ऐसा रूप है जिसमें शासकों का चुनाव देश की जनता करती है।

लोकतंत्र की विशेषताएं

हमने सरल परिभाषा के अनुसार शुरुआत की है लोकतंत्र शासन का वह रूप है जिसमें जनता शासकों का चुनाव करती है इसमें अनेक सवाल उठ खड़े होते हैं

1. इस परिभाषा के अनुसार शासक कौन है किसी सरकार को लोकतांत्रिक कहे जाने के लिए उसके किन अधिकारियों को चुनाव हुआ होना आवश्यक है। लोकतंत्रिक में वह कौन से फैसले हैं जो बिना चुने हुए अधिकारी भी दे सकते हैं।

2. इस तरह के चुनाव को लोकतांत्रिक चुनाव कहते है।

3. किसी चुनाव को लोकतांत्रिक कहने के लिए किन शर्तों को पूरा किया जाना जरूरी है।

4. कौन लोग शासकों का चुनाव कर सकते हैं यह खुद शासक चुने जा सकते हैं क्या इसमें प्रत्येक नागरिक का बराबरी की हैसियत से भाग लेना जरूरी है क्या कोई लोकतांत्रिक व्यवस्था अपने कुछ नागरिकों को इस अधिकार से वंचित कर सकती है।

           प्रमुख फैसले निर्वाचित नेताओं के हाथ

पाकिस्तान में जनरल परवेज मुशर्रफ ने अक्टूबर 1999 में सैनिक तख्तापलट की अगुवाई की उन्होंने लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंका और खुद को देश का मुख्य अधिकारी घोषित किया। बाद में उन्होंने खुद को उपराष्ट्रपति घोषित किया और 2002 में एक जनमत संग्रह करा कर अपना कार्यकाल 5 साल के लिए बनवा लिया। पाकिस्तानी मीडिया मानवाधिकार संगठनों और लोकतंत्र के लिए काम करने वालों ने आरोप लगाया कि जनमत संग्रह एक धोखाधड़ी है और इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है।

 अगस्त 2002 में उन्होंने लीगल फ्रेमवर्क ऑर्डर के जरिए पाकिस्तान के संविधान को बदल डाला। इस आर्डर के अनुसार राष्ट्रपति राष्ट्रीय और प्रांतीय असेंबलीयो  को भंग कर सकता है। मंत्रिपरिषद के कामकाज पर एक राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की गिरनारी रहती है। जिसके ज्यादातर सदस्य फौजी अधिकारी है।

 इस कानून के पास होने पास हो जाने के बाद राष्ट्रीय और प्रांतीय असेंबलीओं के लिए चुनाव कराए गए। इस प्रकार पाकिस्तान में चुनाव भी हुए चुने हुए प्रतिनिधियों को कुछ अधिकार भी मिलेंगे लेकिन सर्वोच्च सेना के अधिकारियों और जनरल मुशर्रफ सत्ता सेना के पास थी। स्पष्ट है कि जनरल मुशर्रफ के शासन वाले पाकिस्तान को लोकतंत्र न कहने के अनेक ठोस कारण है लेकिन यहां सिर्फ एक कारण ही है ‘आइए चर्चा करते  है’ क्या हम कह सकते हैं कि पाकिस्तान के लोगों ने अपने शासकों का चुनाव किया है। हम ऐसा नहीं कह सकते लोगों ने राष्ट्रीय और प्रांतीय आवेशावलियों के लिए अपने प्रतिनिधियों का चुनाव किया है। लेकिन चुने हुए प्रतिनिधि वास्तव में शासक नहीं थे। वे अंतिम फैसला नहीं कर सकते अंतिम फैसला सेना के अधिकारियों और जनरल मुशर्रफ के हाथ में था। जो जनता द्वारा नहीं चुने गए थे। ऐसा तानाशाही और राजा- साहि वाली अनेक शासन व्यवस्थाओं में होता है।

      

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