भारत- आकार और स्थिति:आकार ,भारत तथा विश्व

भारत- आकार और स्थिति

भारत विश्व की प्राचीनतम संस्कृति में से एक है। पिछले 5 दशकों में भारत ने सामाजिक, आर्थिक रूप से बहुमुखी उन्नति की है। कृषि, उद्योग, तकनीकी और आर्थिक विकास में अद्भुत प्रगति हुई है। भारत का विश्व इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

आकार

भारत के भौगोलिक क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल लगभग 32.8 लाख वर्ग किमी है। भारत का क्षेत्रफल विश्व के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 2.4% है। भारत विश्व का सातवां सबसे बड़ा देश है। भारत की स्थल सीमा रेखा लगभग 15200 किमी और समुद्री तट रेखा अंडमान और निकोबार दीप समूह तथा लक्ष्य दीप समूह के साथ 7516.6 किमी है। भारत के उत्तर पश्चिम उत्तर तथा पूर्वी उत्तर पूर्वी सीमा पर नवीनतम वलित पर्वत है। इसके दक्षिण का भूभाग उत्तर में चौड़ा है। और 22 डिग्री उत्तरी अक्षांश में हिंद महासागर की ओर संकरा होता गया है।  इसके पश्चिम में अरब सागर तथा पूर्व में बंगाल की खाड़ी स्थित है। अक्षांश और देशांतर का विस्तार लगभग 30 डिग्री है परंतु फिर भी पूर्व पश्चिम का विस्तार उत्तर दक्षिण के विस्तार की अपेक्षा कम प्रतीत होता है। गुजरात से अरुणाचल प्रदेश के स्थानीय समय में 2 घंटे का अंतर है अतः 82 डिग्री 30 सेकंड पूर्वी देशांतर रेखा को भारत का मानक याम्योत्तर माना गया है। जो कि उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर से गुजरती है अक्षांत का प्रभाव दक्षिण से उत्तर की ओर दिन और रात की अवधि पर पड़ता है।

भारत तथा विश्व

भारतीय भूखंड एशिया महाद्वीप के पूर्व और पश्चिम के मध्य में स्थित है। भारतीय भूभाग एशिया महाद्वीप का दक्षिणी विस्तार है। हिंद महासागर जो कि पश्चिम में यूरोपीय देशों और पूर्वी एशियाई देशों को मिलाता है। भारत को केंद्रीय स्थिति प्रदान करता है। दक्षिण का पठार हिंद महासागर में शीर्षवत फैला हुआ है। और पश्चिम एशिया अफ्रीका और यूरोप के देशों के साथ-साथ पूर्वी एशिया के देशों से भी पूर्वी तट के माध्यम से निकटतम संबंध बनाए हुए हैं। हिंदी महासागर में किसी भी देश की तटीय सीमा भारत जैसी नहीं है। भारत की ऐसी महत्वपूर्ण स्थिति के कारण एक महासागर का नाम इसके नाम पर रखा गया है। जिसे हिंद महासागर कहते हैं।

भारत का संपर्क विश्व के देशों के साथ युगो पुराना है। परंतु यह संबंध समुद्री जलमार्ग की अपेक्षा भूभाग से होकर था उत्तर पर्वतों के दररो से अनेक यात्री प्राचीन काल में भारत आए। जबकि समुद्री मार्ग बहुत समय तक ज्ञात नहीं था। इन मार्गो से प्राचीनतम समय में विचारों और वस्तुओं का आदान प्रदान होता रहा था। भारत का पश्चिम मध्य और पूर्वी एशिया तथा दक्षिणी एशिया के पड़ोसी देशों के साथ एक अद्भुत संपर्क रहा है। इसी प्रकार उपनिषदों के विचार रामायण तथा पंचतंत्र की कहानियां भारत एवं दशमलव प्रणाली आदि संसार के विभिन्न भागों तक पहुंच सके मसाले, मलमल आदि कपड़े तथा व्यापार के अन्य सामान भारत से विभिन्न देशों को ले जाए जाते थे। इसके विपरीत यूनानी स्थापत्य कला तथा पश्चिमी एशिया की वास्तुकला के प्रतीक मीनारों तथा गुंबदो का प्रभाव हमारे देश के विभिन्न भागों में देखा गया।