ब्रह्मांड :महा विस्फोट सिद्धांत,मंदाकिनी

ब्रह्मांड

अस्तित्व एवं ऊर्जा के सम्मिलित रूप को ब्राह्मण कहते हैं। दूसरे शब्दों में सूक्ष्म जीव से लेकर महासाय आकाशगंगा तक के सम्मिलित स्वरूप को ब्रह्मांड कहा जाता है।

महा विस्फोट सिद्धांत-: आरंभ में वे सभी पदार्थ जिनसे ब्रह्मांड बना है अति छोटे गोलक एकाकी परमाणु के रूप में एक ही स्थान पर स्थित था। जिनका आयतन अत्यधिक सुक्ष्म एवं तापमान तथा घनत्व अनंत था। अत्यधिक संकरण के कारण बिंदु का महल का आकाश मिक विस्फोट हुआ से महा विस्फोट (बिग वैग) कहां गया। इस अचानक विस्फोट से पदार्थों का विकास हुआ जिससे सामान्य पदार्थ निर्मित हुए। वैज्ञानिकों का विश्वास है कि महाविस्फोट की घटना आज से 13.7 अरव वर्ष पहले हुई। महाविस्फोट के लगभग 10.5 अरव वर्ष पश्चात यानी आज से 4 वर्ष पूर्व सौरमंडल का विकास हुआ जिसमें ग्रहो तथा उपग्रहों का निर्माण हुआ। इस प्रकार बिग बैक परिघटना से ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई और तभी से उसमें निरंतर विस्तार जारी है। इसके साक्ष्य के रूप में आकाशगंगा के बीच बढ़ती दूरी का साक्ष्य दिया गया है। ब्रह्मांड का व्यास 10 प्रकाश वर्ष है। ब्रह्मांड में अनुमानित 100 अरब मंदाकिनी प्रत्येक मंदाकिनी में अनुमानित 100 अरब तारे होते है।

मंदाकिनी-: तारों का ऐसा समूह जो धुंधला सा दिखाई पड़ता है तथा जो तारा निर्माण प्रक्रिया की शुरुआत का गैस पुंज है मंदाकिनी कहलाता है। हमारी पृथ्वी की अपनी एक मंदाकिनी है जिसे दुग्ध मेखला या आकाशगंगा कहते हैं। अब तक ज्ञात ज्ञात मंदाकिनी का 80% भाग सप्रीला है। इस मंदाकिनी को सबसे पहले गैलीलियो ने देखा था आकाशगंगा की सबसे नजदीकी मंदाकिनी को देवयानी नाम दिया गया।।

आरियन नेबुला हमारी आकाशगंगा का सबसे शीतल और चमकीले तारों का समूह है।