देश की सीमाएं , भारत की रक्षा तैयारी , भारतीय सेना

देश की सीमाएं

1. भारत-पाकिस्तान सीमा- 3323 किलोमीटर

2. भारत- नेपाल सीमा- 1751 किलोमीटर

3. भारत- भूटान सीमा-  699 किलोमीटर

4. भारत म्यांमार (बर्मा)- 1643 किलोमीटर

5. भारत चीन सीमा।   –  3488 किलोमीटर

6. भारत-बांग्लादेश सीमा- 4096.7 किलोमीटर

7. भारत- अफगानिस्तान सीमा- 106 किलोमीटर

1. उत्तरी सीमा-: भारत की उत्तरी सीमा पर नेपाल, भूटान और चीन देश स्थित है। नेपाल और भूटान के साथ हमारे अच्छे संबंध है किंतु चीन ने अक्टूबर 1962 ईस्वी में भारत पर आक्रमण कर काफी बड़े भारतीय क्षेत्र पर अधिकार स्थापित कर लिया। तब से भारत- चीन संबंध महत्वपूर्ण नहीं हो सके है। विशेषज्ञ दल की नोवी बैठक जून 2001 में नई दिल्ली में संपन्न हुई। तथा सीमा के सवाल पर गठित भारत चीन संयुक्त कार्यबल की पहली बैठक 31 जुलाई 2001 को पेइचिंग चीन में संपन्न हुई। केंद्र में भाजपा  सरकार के संगठन के बाद वर्ष 2014 में चीनी राष्ट्रपति की भारत यात्रा पर आशा यह है कि भारत चीन सीमा विवाद शीघ्र ही हल कर लिया जाएगा। इस समय में चीन से हमारे संबंध सुधर रहे हैं और द्विपक्षीय व्यापार बढ़ रहा है।

2. उत्तर पश्चिमी सीमा-: भारत के उत्तर पश्चिमी सीमा पर अफगानिस्तान और पाकिस्तान देश है। इस सीमा पर पाकिस्तान प्रारंभ से ही अड़चनें पैदा करता रहा है। 1965 तथा 1971 ईसवी में पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण कर अपनी संकीर्ण मानसिकता का परिचय दिया है। यद्यपि इन दोनों युद्ध में पाकिस्तान को करारी हार का सामना करना पड़ा। फिर भी पाकिस्तान की भारत विरोधी गतिविधियां जारी रही जिनके कारण इस सीमा पर बराबर तनाव रहा है। इसका मुख्य कारण जम्मू कश्मीर का मुद्दा है। कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग है भारत पाकिस्तान से संबंध सुधारने की दशा में प्रयत्नशील है। अफगानिस्तान से हमारे संबंध प्रारंभ से ही अच्छे हैं लेकिन तालिबान के आतंकवादी सीमा पर अशांति फैलाते रहते हैं।

3. उत्तर पूर्वी सीमा-: मुख्य रूप से उत्तर पूर्वी सीमा पर म्यांमार (बर्मा) और बांग्लादेश स्थित है। तथा कुछ क्षेत्र में चीन की सीमाएं भी मिलती है। म्यांमार के साथ भारत के सदियों से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। भारत ने बांग्लादेश को पाकिस्तान से स्वतंत्र कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी इसलिए बांग्लादेश के साथ हमारे संबंध मैत्रीपूर्ण रहे हैं।

4. दक्षिण की समुद्री सीमा-:भारत के दक्षिण में विशाल हिंद महासागर है दुनिया के कई महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग इसी महासागर से होकर गुजरते हैं सामाजिक दृष्टि से भी इसकी सुरक्षा अति महत्वपूर्ण है अमेरिका सहित विश्व के कई बड़े देश इस पर अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहते हैं। इसलिए भारत के संदर्भ में इस महासागर की सुरक्षा विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है।

                  भारत की रक्षा तैयारी

1. स्वाधीनता के बाद भारत ने रक्षा उत्पाद दोनों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। भारत के इस प्रयास के फलस्वरूप आज 29 ऑर्डिनेंस फैक्ट्री विविध रक्षा सामग्रियों का उत्पादन कर रही हैं।

2. युद्ध काल में खाद्यान्न आदि की बहुत अधिक आवश्यकता होती है। इस आवश्यकता की पूर्ति के लिए सरकार ने खाद्यान्न उत्पादन एवं भंडारण की समुचित व्यवस्था की है।

3. सरकार ने केंद्रीय वार्षिक बजट में प्रतिवर्ष सुरक्षा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त धन की व्यवस्था की है।

4. भारत सरकार ने सेना के आधुनिकतम तकनीकों व शास्त्रों से सुसज्जित करने का प्रयास किया है। उल्लेखनीय है कि भारत 1998 में दूसरा परमाणु विस्फोट करके संसार के परमाणु शक्ति संपन्न देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है।

5. अपने प्रेक्षण शास्त्र कार्यक्रम के अंतर्गत भारत- त्रिशूल, पृथ्वी, अग्नि, आकाश, ब्रह्मोस, धनुष, बराक, सूर्य आदि के निर्माण में सफल रहा है।

                           भारतीय सेना

भारत में अपनी रक्षा के लिए एक शक्तिशाली सेना का संगठन किया है। जिसे भारतीय राष्ट्रीय सेवा( i.n.a.) कहते हैं। भारतीय सेना के तीन प्रमुख अंग हैं।

(1) थल सेना-: यह संसार की शक्तिशाली सेनाओं में से एक है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। इसके सबसे बड़े अधिकारी को थलसेना अध्यक्ष (जनरल) कहा जाता है। भारतीय थल सेना के प्रत्यक्ष कवन का सर्वोच्च अधिकारी जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन- चीफ कहलाता है।

(2) नौ-सेना-: समुद्री सीमा की रक्षा के लिए इन सेना का संगठन किया गया है। इस देश का सर्वोच्च अधिकारी  नौसेना अध्यक्ष (ऐडमिरल) कहलाता है इस सेना का मुख्यालय भी नई दिल्ली में है। नौसेना के प्रत्येक कमान का मुख्याधिकारी फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन- चीफ होता है।

(3) वायु सेना-: वायु सेना का मुख्यालय भी नई दिल्ली में है। इस सेना के सर्वोच्च अधिकारी को वायु सेना अध्यक्ष (एयर चीफ मार्शल) कहा जाता है। भारतीय वायु सेना में 45 स्क्वैड्रन है। प्रत्येक स्क्वैड्रन का लीडर स्क्वैड्रन लीडर कहलाता है।

प्रादेशिक सेना-: प्रादेशिक सेना का संगठन 1949 ईस्वी में किया गया। यह एक अंशकालीन सेना है। संकटकालीन स्थिति में देश की रक्षा हेतु इस सेना का संगठन किया गया है। इस सेना में नागरिकों को भर्ती कर लिया जाता है और अवकाश आदि के समय उन्हें प्रशिक्षित किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर प्रादेशिक सेना के जवान नियमित सैनिकों की भांति देश की रक्षा में युद्ध करते हैं।

नेशनल कैडेट कोर (एन०सी० सी०)-: इसका संगठन 1948 ईस्वी में हुआ था। यह एक महत्वपूर्ण युवा संगठन है इसमें स्कूल कॉलेज के अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को सैनिक प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके तीन ग्रुप होते हैं।

1. सीनियर डिवीजन-: इसमें इंटरमीडिएट और उनके ऊपर की कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र आते हैं।

2. जूनियर डिवीजन-: इसमें कक्षा 9 तथा 10 के विद्यार्थी आते हैं।

3. गर्ल्स डिवीजन-: इसमें प्रत्येक आयु वर्ग के छात्र छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त करती हैं।

एनसीसी का उद्देश्य नव युवकों में राष्ट्रप्रेम की भावना को जागृत करना एवं देश के लिए सैनिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। आज इस संगठन के माध्यम से भारतीय सेना को अच्छे सैनिक एवं सैनिक अधिकारी प्राप्त होते हैं।