गुरुत्वाकर्षण:न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम,गुरुत्व बल के व्यवहारिक उदाहरण ,गुरुत्व तथा गुरुत्व जनित त्वरण, द्रव्यमान तथा भार

गुरुत्वाकर्षण

ब्रह्मांड में उपस्थित प्रत्येक पिण्ड एक दूसरे को अपनी और आकर्षित करते हैं पिंडों के बीच लगने वाले इस बल को गुरुत्वाकर्षण बल कहते हैं तथा इस घटना कोगुरूत्वाकर्षण 

कहते हैं।

 गुरुत्वाकर्षण के कारण ही पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को अपने केंद्र की ओर आकर्षित करती है यही कारण है कि पृथ्वी से ऊपर की ओर फेंकी गई कोई वस्तु वापस नीचे गिरती है पृथ्वी द्वारा किसी वस्तु पर लगाए गए गुरुत्वाकर्षण बल को गुरुत्व बल कहते हैं गुरुत्व बल वह आकर्षण बल है जिससे किसी वस्तु को पृथ्वी अपनी ओर खींचती है। जर्मन वैज्ञानिक न्यूटन ने सर्वप्रथम गुरुत्वाकर्षण बल की व्याख्या की थी।

न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम

ब्रम्हांड के सभी पिंड एक दूसरे को अपनी और आकर्षित करते हैं इस बल को गुरुत्वाकर्षण बल के का नाम इस बार का गुरुत्वाकर्षण बल के नाम से जाना जाता है गुरुत्वाकर्षण बल सदैव आकर्षण बल ही होता है न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण बल के नियमों को निम्न तरह व्यक्त किया है।

 इस नियम के अनुसार ब्रह्मांड में किन्हीं दो पिंडों के बीच कार्य करने वाला बल

(1) पिण्डो के द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती होता है।

(2) उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

इस बल की दिशा पिण्डो को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश होती है।

गुरुत्व बल के व्यवहारिक उदाहरण

(1) यदि किसी पिंड को पृथ्वी की सतह से ऊपर की ओर प्रक्षेपित किया जाए तो पिण्ड गुरूत्व बल  के कारण वापस पृथ्वी की सतह पर लौट आता है।

(2) कृत्रिम उपग्रहो को पृथ्वी के चारों ओर वृत्ताकार कक्षा में परिभ्रमण के लिए आवश्यक अभिकेंद्रीय बल गुरुत्व बल से प्राप्त होता है।

(3) गुरुत्व बल के कारण ही पृथ्वी के चारों ओर वायुमंडल विद्यमान है।

(4) गुरुत्व बल के कारण ही पृथ्वी की सतह पर प्राणियों का चलना संभव है।

गुरुत्व तथा गुरुत्व जनित त्वरण

पृथ्वी द्वारा किसी बिंदु पर आरोपित गुरुत्वाकर्षण बल को गुरुत्व कहते हैं जब कोई वस्तु पृथ्वी की और गिरती है तो पृथ्वी के गुरुत्व बल के कारण उसके गिरने का वेग बढ़ जाता है अर्थात उसकी गति में त्वरण उत्पन्न हो जाता है। किसी वस्तु पर गुरुत्व बल के कारण जो त्वरण उत्पन्न होता है उसे गुरुत्व जनित त्वरण कहते हैं। इसे g से प्रदर्शित करते हैं। गुरुत्वीय त्वरण वस्तु के आकार, आकृति, द्रव्यमान आदि पर निर्भर नहीं होता है। गुरुत्व त्वरण का मात्रक मीटर प्रति सेकंड स्क्वायर होता है। गुरुत्व त्वरण परिमाण में उस बल के बराबर होता है जिसे पृथ्वी एकांक द्रव्यमान वाली एक वस्तु को अपनी केंद्र की ओर आकर्षित करती है। पृथ्वी की सतह पर विभिन्न स्थानों पर g का मान भिन्न-भिन्न पाया जाता है गुरुत्वीय त्वरण ब्रह्मांड में सभी जगह विद्यमान है। प्रत्येक ग्रह की सतह पर इस का मान अलग होता है। चंद्रमा की सतह पर इसका की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण का मान धरती की सतह पर इसके मान का 1/6 वा भाग ही होता है।

गुरुत्व त्वरण के मान में परिवर्तन

(1) पृथ्वी की सतह से ऊपर जाने पर g का मान घटता है।

(2) पृथ्वी की सतह के अंदर जाने पर g का मान घटता है

तथा पृथ्वी के केंद्र पर g का मान शून्य होता है।

(3) गुरुत्वीय त्वरण का मान ध्रुवों पर अधिकतम तथा भूमध्य रेखा पर न्यूनतम होता है।

द्रव्यमान तथा भार

(1) द्रव्यमान-: किसी वस्तु में पदार्थ का परिमाण ही उसका द्रव्यमान कहलाता है। यह एक अदिश राशि है इसका मान नियत रहता है। इसका SI मात्रक किलोग्राम है।

(2) भार-: पृथ्वी जिस बल से किसी वस्तु को अपने केंद्र की ओर आकर्षित करती है वह उस वस्तु का भार कहलाता है। इसे W से व्यक्त करते हैं।

भार (w) = वस्तु का द्रव्यमान(m) × उस स्थान पर गुरुत्वीय त्वरण(g) ।

                    W = mg

इसका SI मात्रक न्यूटन होता है।