ऊर्जा संसाधन : कोयला, भारत में कोयला का वितरण, भारत में कोयले का उपयोग, उत्पादन एवं व्यापार

किसी भी देश के औद्योगिकीकरण में कारखानों को चलाने के लिए किसी ने किसी चालक चालक या शक्ति के साधन की आवश्यकता पड़ती है। वे पदार्थ जिनसे मशीनों को चलाने के लिए शक्ति प्राप्त होती है शक्ति के साधन कहलाते हैं।

इस अध्याय के अंतर्गत हम निम्न शक्ति के साधनों का अध्ययन करेंगे जैसे-: कोयला, पेट्रोल, प्राकृतिक गैस, परमाणु खनिज आदि।                         

कोयला

कोयला शक्ति का सबसे महत्वपूर्ण साधन है संसाधन है। किसी भी देश में इसकी उपस्थिति उस देश की प्रगति की सूचक है। इसका उपयोग शक्ति के साधन के रूप में उद्योगों में कच्चे माल के रूप में किया जाता है। इसकी इतनी उपयोगिता है। कि लोग इसे काला सोना या काला हीरा कहते हैं।

भारत कोयला उत्पादन में विश्व में छठे स्थान पर है यह विश्व का सबसे महत्वपूर्ण कोयला उत्पादक देश है चीन और अमेरिका के बाद भारत सबसे अधिक कोयला उत्पन्न करता है। भारतीय भूगर्भीय सर्वेक्षण के अनुसार 1 अप्रैल 2010 को देश में 12 से 100 मीटर की गहराई तक सुरक्षित कोयले का भंडार 285.87 बिलियन तथा यहां कुल सिंचित कोयला भंडार का 20% झारखंड का 20% ओडिशा 11% पश्चिम बंगाल 21% छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश 14% शेष 11% अन्य राज्य में पाया जाता है।

भारत में तीन प्रकार का कोयला पाया जाता है एंप्रेस आइट्यूब, डिटरमिनर्स, लिग्नाइट

भारत में कोयला का वितरण

भारत में राज्य के अनुसार कोयला का वितरण निम्न प्रकार है।

(1) झारखंड-: झारखंड राज्य कोयला उत्पादक तथा संचित भंडार दोनों ही क्षेत्रों में भारत में प्रथम स्थान पर है। यहां से भारत का 20% कोयला निकाला जाता है। दामोदर घाटी में जरिया, बोकारो, डाल्टनगंज, गढ़पुरा आदि मुख्य कोयला उत्पादक क्षेत्र है। यहां पर जरिया में सबसे बड़ी कोयले की खान है। जिसका विस्तार 436 वर्ग किमी क्षेत्र में है। इस स्थान से बिट्यूमिनस कोयला मिलता है।

(2) ओडिशा-: कोयला उत्पादक में इस राज्य का स्थान दूसरा है। उड़ीसा राज्य के मुख्य कोयला उत्पादक क्षेत्र सुंदरगढ़, धेनकनाल और संबलपुर है।

(3) पश्चिमी बंगाल-: कोयला उत्पादन में इस राज्य का स्थान तीसरा है। यहां से 21% कोयला प्राप्त होता है। यहां पर रानीगंज मुख्य कोयला उत्पादक क्षेत्र है जहां से कोकिंग और गैर कोकिंग किस्म का कोयला निकलता है।

(4) आंध्र प्रदेश-: कोयला उत्पादन मैं यह राज्य भारत में चौथे स्थान पर आता है। यहां से देश का 10% कोयला उत्पन्न किया जाता है। यहां पर गोदावरी नदी की घाटी से कोयला निकाला जाता है। इस घाटी में सिंगरेनी, तंदूर और सस्ती प्रमुख कोयला क्षेत्र है।

(5) मध्य प्रदेश-: कोयला उत्पादन में इस राज्य का स्थान उल्लेखनीय है। सिंगरौली, उमरिया, कोटरा, शाहपुर, शाहपुर यहां से भारत का 14% कोयला निकाला जाता है।

(6) छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र-: छत्तीसगढ़ राज्य में कोरबा, रायगढ़, मांड घाटी तथा महाराष्ट्र राज्य में चंद्रपुर, बसोट, आदि यहां के कोयला उत्पादक क्षेत्र हैं। महाराष्ट्र कोयला उत्पादन में देश में पांचवें स्थान पर आता है।

(7) अन्य क्षेत्र-: इन राज्यों के अतिरिक्त राजस्थान, तमिलनाडु, असम, मेघालय, उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानों पर भी कोयला के भंडार पाए जाते हैं।

भारत में कोयले का उपयोग

भारत में कोयला ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। यह देश की ऊर्जा का 67% खपत को पूरा करता है। इसका उपयोग इस्पात और काबो रसायन उद्योग में भी होता है। भारत में कोयले से ताप विद्युत पैदा की जाती है। उसके उपयोग द्वारा उत्तर प्रदेश में हरदुआगंज, अनपरा आदि स्थानों पर ताप विद्युत केंद्र स्थापित किए गए हैं।

 कोयला का संरक्षण

(1) कोयले की खुदाई करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि कोयले के चूरे कम हो।

(2) कोयला की खान को बाढ़ के पानी से बचाना चाहिए।

(3) खानों की खुदाई करते समय पूरा कोयला निकाल लेना चाहिए।

(4) कोयले को खुले स्थान पर नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे उसकी गुणवत्ता कम हो जाती है।

(5) कोयले को जिस भट्टी में जलाया जाए उनकी चिमनी ऊंची होनी चाहिए.

उत्पादन एवं व्यापार

सन 1950 में भारत में 344 लाख टन कोयले का उत्पादन हुआ था। यह सन 2003 में बढ़कर 341 मिलियन टन तक हो गया। सन 2013-14 में 565.77 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ। जो पहले की अपेक्षा 

बहुत अधिक है। भारत से बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मांरीसन तथा म्यांमार आदि देशों को कोयला निर्यात भी किया जाता है। निर्यात के साथ-साथ लोहा इस्पात बनाने के लिए कोकिंग किस्म का कोयला आयात करता है।

प्राकृतिक गैस

प्राकृतिक गैस उर्जा का नवीन स्रोत है। इसका उपयोग घरेलू है। यह कच्चे तेल के साथ मिश्रित अवस्था में मिलती है।

भारत में प्राकृतिक गैस का विवरण

भारत के पूर्वी क्षेत्र में असम अरुणाचल प्रदेश पश्चिम में गुजरात, मुंबई आदि क्षेत्रों में गैस के विशाल भंडार स्थित हैं अब तक गुजरात, मुंबई में काफी गैस को जलाया जाता था लेकिन अब इस पर रोक लगाई जा रही है।

प्राकृतिक गैस का उपयोग

प्राकृतिक गैस का उपयोग पेट्रो रसायन उद्योग में कच्चे माल के रूप में किया जाता है। तथा इसका उपयोग रासायनिक उर्वरकों के निर्माण में किया जाता है। प्राकृतिक गैस का उपयोग ईधन के साधन के रूप में भी किया जाता है.

प्राकृतिक गैस का संरक्षण

(1) प्राकृतिक गैस को सिलेंडरों में भरकर रसोई इंधन के रूप में सुरक्षित रखा जा सकता है।

(2) प्राकृतिक गैस का उपयोग करके इसे संरक्षित किया जा सकता है।

(3) पेट्रो रसायन व रासायनिक खादों में इसका उपयोग करके इसे संरक्षित किया जा सकता है।

 उत्पादन एवं व्यापार

 वर्ष 1980 में 235.8 करोड़ घनमीटर प्राकृतिक गैस का उत्पादन हुआ था। अब 2011 में यह 522.2 करोड़घन मीटर हो गया है। देश में इस का अनुमानित भंडार 54,100 करोड़ घन मीटर है। 

वैकल्पिक साधन

(1) पवन ऊर्जा-: पवन ऊर्जा का प्रयोग पानी खींचने के लिए किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि हेतु सिंचाई की परम आवश्यकता पड़ती है। पवन ऊर्जा इस कार्य में सहायक है। गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और उड़ीसा इसके लिए उपर्युक्त राज्य है।

पवन ऊर्जा के क्षेत्र में भारत का पांचवा स्थान है। तथा एशिया में दूसरा स्थान है। भारत में तमिलनाडु प्रथम स्थान पर और महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर तथा कर्नाटक तीसरे स्थान पर है।

(2) सौर ऊर्जा-: सौर ऊर्जा, ऊर्जा का अक्षय साधन है। इससे अधिक मात्रा में ऊर्जा मिलती है। यह विशाल संभावनाओं वाला साधन है। इस क्षेत्र में सौर चुल्हो का विकास एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसके बिना किसी भी खर्च के भोजन बनाया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के छोटे बिजली घरों के निर्माण की भी योजना चल रही है। आजकल खाना पकाने, पानी गर्म करने, फसलों को सुखाने, सौर ऊर्जा की लालटेन का प्रयोग भी चल रहा है। यह ऐसा साधन है। जो कभी समाप्त नहीं हो सकता। देश में फरवरी 2014 तक कुल मिलाकर 1175 मेगावाट क्षमता से अधिक सौर बिजली, उत्पादन क्षमता प्राप्त की गई है। 130 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा संयंत्र नीमच जिले में जावर तहसील के पंडालिया, भगवानपुरा गांवों में स्थापित किया गया है 370 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित 1100 करोड़ के निवेश वाली यह परियोजना देश की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना है।